कुछ टपकते हुए आधुनिक प्रमेय

अद्यतन एक बहुत सुखकर प्रक्रिया है। खासकर बुढ़े बुजुर्गों के लिए। भारत एक पुरानी सभ्यता है तो यहाँ सब कुछ ही बहुत पुराना हो गया है। मतलब बुर्जुआ टाइप का! इसलिए इस विषम समय में भारत को अपडेट करते रहना भी एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण कार्य है। समय की घिसावट से कुछ नए आधुनिक प्रमेय लार की तरह टपकते ही रहते हैं और उन प्रमेयों को स्पष्ट करते ही रहना चाहिए। तो इस प्रयोजन हेतु कुछ टपकते हुए आधुनिक प्रमेय:

1. एक अकेला क्रांतिकारी सात लठैतों के बराबर होता है। अतः अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कम से कम आठ की संख्या में ही अप्रोच करें। - सूत्र 15/100 करोड़ वाया वारिस पठान


2. तीन लट्ठ लगाकर छः बार जिन्दाबाद बोलने से पक्के क्रांतिकारी का सर्टिफिकेट मिलता है। ऐसे क्रांतिकारी को भारत रत्न दिया जाना चाहिए। यही राष्ट्रवाद और वसुधैव कुटुंब का असली और मूल भाव है। - रवीश कुमार वाया अमूल्या लियोना

3. सडक़ रोककर यातायात प्रभावित करने से बेरोजगारी में कमी आती है। साथ ही जीडीपी में विकास भी होता है। उदाहरण के तौर पर भारतीय अर्थव्यवस्था अब पाँचवीं सबसे बडी अर्थव्यवस्था बन गई है। - शाहीन बाग

4. भारत की संप्रभुता को चुनौती देने से भारत की संप्रभुता को मजबूती मिलती है। इतना ही नहीं भारत को एक सकारात्मक अंतरराष्ट्रीय पहचान भी मिलती है। अतः ऐसी चुनौती समय-समय पर मिलती रहनी चाहिए। - शरजील इमाम

5. जय श्रीराम जैसे साम्प्रदायिक नारे लगाने से गंगा जामुनी तहजीब कमजोर होती है। इसलिए लाइलाह इल्लाह मंत्र का जाप करना चाहिए। ऐसा करने से धर्मनिरपेक्षता को मजबूती मिलती है। - बुद्धिजीवी

6. गद्दारों की पहचान करने के लिए एक विशेष नंबर का चश्मा पहनना पडता है। - ठाकुर एंड वर्मा

7. चोर की दाढी तिनके से बनी होती है। - असुदुद्दीन ओवैसी

8. विद्वान के लिए पढना एक वर्जित कार्य है। उसका कर्तव्य हर हाल में सिर्फ और सिर्फ स्क्रिप्ट राइटर के स्क्रिप्ट का पालन करना है। - अनुराग कश्यप एंड स्वरा भाष्कर

9. हिन्दुस्तान किसी के बाप का नहीं है। इसलिए एनआरसी लागू नहीं होगा। - फतवा कवि जी 

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